कौन हैं Jyotiraditya Scindia, क्या महत्तव है इनका मध्यप्रदेश की राजनीति में

1 जनवरी 1971 को पैदा हुए Jyotiraditya Scindia मध्य प्रदेश के प्रतिष्ठित सिंधिया राजघराने से संबंध रखते हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के नामकरण को लेकर एक मशहूर किस्सा है। ज्योतिरादित्य की दादी चाहती थी कि उनका नाम देवता ज्योतिबा के नाम पर रखा जाए, जबकि माधवराव और माधवीराजे ने विक्रमादित्य नाम सोच रखा था। बाद में उनका नाम ज्योतिरादित्य रखा गया।

Jyotiraditya Scindia के जन्म पर महीनो तक ग्वालियर में जश्न मनाया गया। क्योंकि उनके जन्म के साथ ही ग्वालियर राजघराने को अपना वारिस मिल गया था। ये इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि इससे करीब 100 साल पहले सिंधिया राजवंश को वारिस गोद लेना पड़ा था। सिंधिया वंश में कई पीढिय़ों से एकलौते पुत्र वारिस ही देखे गये हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया, माधवराव सिंधिया के इकलौते पुत्र है और ज्योतिरादित्य के इकलौते पुत्र महाआर्यमन सिंधिया है। माधवराव के पिता जीवाजी राव भी एक अकेले वारिस ही थे।

ज्योतिरादित्य सिंधिया की शादी बडौदा के गायकवाड़ घराने की राजकुमारी प्रियदर्शनी राजे से सन् 1994 में हुई। प्रियदर्शनी राजे के पिता कुंवर संग्राम सिंह के तीसरे बेटे थे, जबकि उनकी मां नेपाल राजघराने से ताल्लुक रखती हैं। प्रियदर्शिनी दुनिया की पचास सबसे खूबसूरत महिलाओं की सूची में जगह बना चुकी हैं। ग्वालियर की महारानी प्रियदर्शिनी और ज्योतिरादित्य सिंधिया के दो बच्चे भी हैं- पुत्र महाआर्यामन और पुत्री अनन्या राजे।

सन् 1993 में हावर्ड यूनिवर्सिटी से इकनॉमी की डिग्री हासिल करने वाले सिंधिया ने स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनस से एमबीए की डिग्री भी हासिल की। उनके पिता माधवराव सिंधिया तथा दादी ग्वालियर की राजमाता विजयराजे सिंधिया भी राजनीति में रह चुकी हैं। सिंधिया परिवार का राजनीतिक सफर विजयराजे सिंधिया से शुरू हुआ. उन्हें ग्वालियर राजघराने की राजमाता के नाम से भी जाना जाता है. राजमाता ने 1957 में कांग्रेस के टिकट पर शिवपुरी (गुना) लोकसभा सीट से चुनाव जीता और अपनी राजनीति की शुरुआत की। हालांकि यह सिलसिला लंबे समय तक नहीं चला और बाद में 1967 में उन्होंने जनसंघ का दामन थाम लिया. 1980 में जनसंघ में उनकी राजनीति की नई शुरुआत हुई और बाद में इस पार्टी की उपाध्यक्ष तक बन गईं।

विजयराजे के बेटे और ज्योतिरादित्य के पिता माधवराव सिंधिया की राजनीति भी जनसंघ से शुरू हुई। माधवराव सिंधिया ने मध्य प्रदेश में गुना निर्वाचन क्षेत्र से जनसंघ के टिकट पर 1971 के आम चुनाव लड़ा और जीता। फिर कुछ वर्षों बाद माधवराव सिंधिया ने 1980 में कांग्रेस का दामन थामा तो दूसरी ओर उनकी दो बहनें वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे ने अपनी मां का अनुसरण करते हुए बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की।

साल 2001 में विमान दुर्घटना में कांग्रेस के कद्दावर नेता व पिता माधवराव सिंधिया की मृत्यु होने के बाद वह भारत लौट आए और राजनीति में सक्रिय हो गए। साल 2002 में पिता की सीट गुना से पहली बार चुनाव लड़ सिंधिया लोकसभा पहुंचे। 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने उसी सीट से दूसरी बार जीत हासिल की। सिंधिया यूपीए की दोनों सरकारों में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। 2002 से 2014 तक लगातार चार बार- गुना लोकसभा सीट से जीतते आ रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी पाँचवीं चुनावी लड़ाई भारतीय जनता पार्टी के कृष्णपाल सिंह यादव से भारी अंतर से हार गए।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर के राजसी परिवार से आते हैं, यहां इनका 140 साल पुराना महल ‘जय विलास पैलेस’ है जो पूरी दुनिया में खास है। 1874 में जीवाजी राव सिंधिया द्वारा यूरोपियन शैली में बनाए गए इस शानदार महल जयविलास पैलेस की छतों पर सोना लगा हुआ है। इस महल का डिजाइन लेफ्टिनेंट कर्नल सर माइकल फिलोज द्वारा तैयार किया गया था। इस महल को बनाने में ब्रिटिश, भारतीय और इतावली शैली का प्रयोग किया गया है। माना जाता है कि जिस वक्त इस महल का निर्माण किया गया था, तब इसकी कीमत 1 करोड़ थी, लेकिन आज इस विशाल और आकर्षक महल की कीमत अरबों में बताई जाती है।

इस महल का निर्माण इंग्लैंड के प्रिंस एडवर्ड-VII के स्वागत में कराया गया था। इस खूबसूरत महल को देखकर नहीं लगता कि इसका निर्माण मात्र किसी के स्वागत के लिए किया गया होगा। इस महल को फ्रांस के वर्साइल्स पैलेस की तरह बनाने का प्रयास किया गया था। महल को सजाने के लिए विदेश से कारीगरों को बुलवाया गया। इस महल में एक विशाल झूमर लगा हुआ है, जिसका वजन 3500 किलो है जो अपने आप में ही काफी अनोखा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि झूमर लगाने के लिए हाथियों की सहायता ली गई थी। दरअसल हाथियों का इस्तेमला छत की मजबूती जाचंने के लिए किया गया था, जहां झूमर लगना था। इंजीनियरों ने छत पर 10 हाथियों को 7 दिनों तक खड़ा करके रखा था, जिसके बाद ही इस छत पर 3500 किलो वजनी झूमर को टांगा गया था। इस विशाल महल में एक बड़ा डाइनिंग हॉल है, जिसमें एक बार में कई लोग बैठ कर खाना खा सकते हैं। इस इाडिनिंग हॉल का मुख्य आकर्षण चांदी की ट्रेन है, जिसका इस्तेमाल महमानों को भोजन परोसने के लिए किया जाता था। यह ट्रेन खाने के साथ-साथ मेहमानों का मनोरंजन भी करती थी। इस महल में कुल 400 कमरे हैं, जिनमें से 40 कमरों को संग्रहालय के रूप में तब्दील कर दिया गया है। बाकी हिस्सों में सिंधिया परिवार रहता है। इस संग्रहालय को जीवाजी राव सिंधिया म्यूजियम नाम दिया गया है।

कांग्रेस से 18 साल का साथ छोड़कर ज्योतिरादित्य सिंधिया अब बीजेपी का हिस्सा बन रहे हैं. यह उनका दूसरा घर होगा जहां विजयराजे के बाद वसुंधरा और यशोधरा राजे सिंधिया अपना रुतबा काफी पहले बना चुकी हैं.

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