Independence Day 2020: PM MODI के भाषण में कोरोना, लद्दाख, आत्मनिर्भता सब थे मौजूद

देश में आज स्वतंत्रता दिवस की 73वीं सालगिरह मनाई जा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से आज सातवीं बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रीय ध्वज फहरा दिया है. इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने देश को संबोधित किया. उन्होंने अपने भाषण में सबसे पहले देश के वीर जवानों को नमन करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी.

पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना के इस असाधारण समय में, ‘सेवा परमो धर्म:’ की भावना के साथ, अपने जीवन की परवाह किए बिना हमारे डॉक्टर्स, नर्से, पैरामेडिकल स्टाफ, एंबुलेंस कर्मी, सफाई कर्मचारी, पुलिसकर्मी, सेवाकर्मी, अनेको लोग, चौबीसों घंटे लगातार काम कर रहे हैं. मैं अपना आभार उनके लिए प्रकट करता हूं. गुलामी का कोई कालखंड ऐसा नहीं था जब हिंदुस्तान में किसी कोने में आजादी के लिए प्रयास नहीं हुआ हो, प्राण-अर्पण नहीं हुआ हो. हमें उन वीरों के योगदान को हमेशा याद रखना चाहिए. अगले वर्ष जब हम आजादी के 75वें वर्ष में प्रवेश करेंगे तो हम अपने संकल्पों को पूर्ण करने के उत्सव के रूप में मनाएंगे. हम ये ना भूलें कि गुलामी के लंबे समयकाल में कोई ऐसा नहीं रहा जिसने अपना योगदान आजादी के जनआंदोलन में न दिया हो. हम आजादी के पर्व को आज मना पा रहे हैं ये उन्हीं वीरों की बदौलत हुआ है. विस्तारवाद की सोच ने सिर्फ कुछ देशों को गुलाम बनाकर ही नहीं छोड़ा, बात वही पर खत्म नहीं हुई, ये विश्व के देशों के विकास पर असर डालने वाला साबित हुआ. ऐसे में भीषण युद्धों और भयानकता के बीच भी भारत ने आजादी की जंग में कमी और नमी नहीं आने दी. आत्मनिर्भर भारत सिर्फ एक शब्द नहीं, संकल्प बन गया है. मैं मानता हूं कि इसके सामने चुनौतियां हैं लेकिन देश के करोड़ों नागरिक इसे पूरा करने का संकल्प लें तो ये कार्य बिलकुल कठिन नहीं है. आजाद भारत की मानसिकता ‘वोकल फॉर लोकल’ की होनी चाहिए. आखिर कब तक हमारे ही देश से गया कच्चा माल, फिनिश्ड प्रोडक्ट बनकर भारत में लौटता रहेगा. आत्मनिर्भर भारत का मतलब सिर्फ आयात कम करना ही नहीं, हमारी क्षमता, हमारी क्रिएटिविटी और हमारे स्किल्स को बढ़ाना भी है. ज दुनिया की बहुत बड़ी-बड़ी कंपनियां भारत का रुख कर रही हैं और हमें मेक इन इंडिया के साथ-साथ मेक फॉर वर्ल्ड के मंत्र के साथ आगे बढ़ना है. हम अपने आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के तहत इस कार्य को आगे करने के लिए तेज गति से बढ़ेंगे. भारत को आधुनिकता की तरफ, तेज गति से ले जाने के लिए, देश के ओवरऑल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को एक नई दिशा देने की जरूरत है. ये जरूरत नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन प्रोजेक्ट से पूरी होगी. इस पर देश 100 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. अलग-अलग सेक्टर्स के लगभग 7 हजार प्रोजेक्ट्स को पहचाना भी जा चुका है. ये एक तरह से इंफ्रास्ट्रक्चर में एक नई क्रांति की तरह होगा. हमने देश के 110 जिलों की पहचान की है जो देश की विकास यात्रा में कहीं पीछे छूट रहे हैं उनको विकास की मुख्यधारा में लेकर आएंगे और उनका संतुलित विकास होगा. हमारे देश में अलग-अलग जगहों पर विकास की तस्वीर अलग-अलग दिखती है. कुछ क्षेत्र बहुत आगे हैं, कुछ क्षेत्र बहुत पीछे हैं तो कुछ जिले बहुत आगे हैं, कुछ जिले बहुत पीछे हैं. ये असंतुलित विकास आत्मनिर्भर भारत के सामने बहुत बड़ी चुनौती है. हमारे यहां कहा गया है कि ‘सामर्थ्य्मूलं स्वातन्त्र्यं, श्रममूलं च वैभवम्’. अर्थात किसी समाज, किसी भी राष्ट्र की आज़ादी का स्रोत उसका सामर्थ्य होता है, और उसके वैभव का, उन्नति प्रगति का स्रोत उसकी श्रम शक्ति होती है. हमारे देश का सामान्य नागरिक, चाहे शहर में रह रहा हो या गांव में, उसकी मेहनत, उसके परिश्रम का कोई मुकाबला नहीं हो सकता है. आज से देश में एक और बहुत बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है और ये है नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन. नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन, भारत के हेल्थ सेक्टर में नई क्रांति लेकर आएगा. इसके तहत हर नागरिक को एक हेल्थ आईडी दी जाएगी. इसके बाद आपके हर टेस्ट, हर बीमारी, आपको किस डॉक्टर ने कौन सी दवा दी, कब दी, आपकी रिपोर्ट्स क्या थीं, ये सारी जानकारी इसी एक हेल्थ आईडी में समाहित होंगी. भारत की संप्रभुता का सम्मान हमारे लिए सर्वोच्च है. इस संकल्प के लिए हमारे वीर जवान क्या कर सकते हैं, देश क्या कर सकता है, ये लद्दाख में दुनिया ने देखा है. लेकिन एलओसी से लेकर एलएसी तक, देश की संप्रभुता पर जिस किसी ने आंख उठाई है, देश ने, देश की सेना ने उसका उसी भाषा में जवाब दिया है. हमारी सरकार के शासनकाल में 7 करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त गैस सिलेंडर दिए गए, राशनकार्ड हो या न हो, 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त अन्न की व्यवस्था की गई, बैंक खातों में करीब-करीब 90 हजार करोड़ रुपए सीधे ट्रांसफर किए गए. कुछ वर्ष पहले तक ये सब कल्पना भी नहीं की जा सकती थी कि इतना सारा काम, बिना किसी लीकेज के हो जाएगा, गरीब के हाथ में सीधे पैसा पहुंच जाएगा. वोकल फॉर लोकल, री-स्किल और अप-स्किल का अभियान, गरीबी की रेखा के नीचे रहने वालों के जीवनस्तर में आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का संचार करेगा. अपने इन साथियों को अपने गांव में ही रोजगार देने के लिए गरीब कल्याण रोजगार अभियान भी शुरू किया गया है. आज भारत में कोराना की एक नहीं, दो नहीं, तीन-तीन वैक्सीन्स इस समय टेस्टिंग के चरण में हैं. जैसे ही वैज्ञानिकों से हरी झंडी मिलेगी, देश की तैयारी उन वैक्सीन्स की बड़े पैमाने पर उत्पादन की भी है. एक साल जम्मू कश्मीर की एक नई विकास यात्रा का साल है. ये एक साल जम्मू कश्मीर में महिलाओं, दलितों को मिले अधिकारों का साल है. ये जम्मू कश्मीर में शरणार्थियों के गरिमापूर्ण जीवन का भी एक साल है. लोकतंत्र की सच्ची ताकत स्थानीय इकाइयों में है और हम सभी के लिए गर्व की बात है कि जम्मू-कश्मीर में स्थानीय इकाइयों के जनप्रतिनिधि सक्रियता और संवेदनशीलता के साथ विकास के नए युग को आगे बढ़ा रहे हैं. बीते वर्ष लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाकर, वहां के लोगों की बरसों पुरानी मांग को पूरा किया गया है और हिमालय की ऊंचाइयों में बसा लद्दाख आज विकास की नई ऊंचाइयों को छूने के लिए आगे बढ़ रहा है. जिस प्रकार से सिक्किम ने ऑर्गैनिक स्टेट के रूप में अपनी पहचान बनाई है, वैसे ही आने वाले दिनों में लद्दाख, अपनी पहचान एक कार्बन न्यूट्रल क्षेत्र के तौर पर बनाए, इस दिशा में भी तेजी से काम हो रहा है. देश के 100 चुने हुये शहरों में प्रदूषण कम करने के लिए एक संकल्पित अप्रोच के साथ एक विशेष अभियान पर भी काम हो रहा है. अपनी बायोडाइवर्सिटी के संरक्षण और संवर्धन के लिए भारत पूरी तरह संवेदनशील है. बीते कुछ समय में देश में शेरों की, टाइगर की आबादी तेज़ गति से बढ़ी है और अब देश में हमारे एशियाई शेरों के लिए एक प्रोजेक्ट लायन की भी शुरुआत होने जा रही है.

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