औरैया हादसा: चूने की बोरियों में ही दब गई मजदूरों की चीखें

इटावा-कानपुर हाईवे पर शनिवार तड़के डीसीएम (मिनी ट्रक) में ट्रॉला ट्रक की टक्कर से 26 प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई और 38 मजदूर घायल हो गए। हादसे में चूने की बोरियां लादे ट्रॉला खाई में जा पलटा और ज्यादातर की मौत ट्रॉला और बोरियों में दबने से हुई। ये सभी मजदूर लॉकडाउन में रोजगार गंवाने के बाद अपने घर जा रहे थे। इनमें से 12 झारखंड के बोकारो जिले के रहने वाले हैं। सभी 12 मजदूर बोकारो के पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र निवासी हैं। जिला प्रशासन ने यहां आधिकारिक तौर पर तत्काल आठ लोगों की पुष्टि की है। इनमें राहुल सहीस, कनीलाल, राजा, गोवर्धन कालिंदी, उत्तम गोस्वामी, डाक्टर महतो, सोमनाथ गोस्वामी और रंजन कालिंदी का नाम शामिल हैं। राहुल सहीस 11 मई को ही पिता बना था और बच्चे को देखने के लिए पैदल ही आ रहा था।

औरैया में शनिवार को हुए हादसे के बाद चूने के बोरे में दबे मजदूरों की छटपटाहट व्यवस्था की लाचारियां बयां कर रही थी। मौके से लेकर अस्पताल तक चीखें और सिसिकियां ही गूंज रही थीं। ट्राला पलटने से चूने की बोरियों के तले दबे मजदूरों की चींखें तक कोई न सुन सका। हादसा औरैया के पास चिरूहली क्षेत्र में एक ढाबे के पास हुआ। पुलिस ने बताया कि दोनों ट्रक में मजदूर सवार थे। दिल्ली से आया ट्रक ढाबे के पास रुका था। कुछ लोग चाय पी रहे थे। तभी राजस्थान से आ रहे ट्रक ने उसमें टक्कर मार दी। इसमें चूना भरा हुआ था और 30 मजदूर सवार थे। जो लोग चाय पीने ट्रक से उतरे थे उनकी जान बच गई

प्रवासी मजदूरों को घरों तक पहुंचाने के लिए विशेष ट्रेनों और बसों के सरकारी इंतजाम शनिवार को औरैया हादसे में जान गंवाने वालों के साथ दम तोड़ते नजर आए। बेबस मजदूर अभी भी पैदल या माल वाहक वाहनों से घर तक का सफर करने को मजबूर हैं।

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